उठो द्रौपदी शस्त्र संभालो

इन दिनों बढ़ते बलात्कार व हत्याएँ समाचार पत्रों व सोशल मीडीया में चर्चा में  हैं. श्री अटल बिहारी बाजपेई की एक कविता 'उठो द्रौपदी वस्त्र संभालो' भी वायरल हो रही है. मुझे लगा कि आज के सन्दर्भ में द्रौपदी को वस्त्र संभालने की अपेक्षा शस्त्र उठाने की आवश्यकता अधिक है. इसलिए, बाजपेई जी से माफी … Continue reading उठो द्रौपदी शस्त्र संभालो

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Our Fake Heroes

So, Salman Khan got bail after being convicted in the Black Buck case. Good for him. Not so good for Blackbuck, of course. Most people I know are of the opinion that, instead of sending him to jail, he could be ordered to pay a hefty amount of money, to the tune of a few … Continue reading Our Fake Heroes

इंडिया, भारत व हिन्दुस्तान

आजकल  कहा  जाने  लगा  है  कि  इंडिया  और  भारत  दो  अलग  अलग  देश  हैं.  इंडिया  शहरों  में  बसता  है  और  भारत  कस्बों  और  गावों  में.  मतलब  शायद  यह  है  कि  शहरी  नागरिक  संभ्रांत  परिवारों  के  अँग्रेज़ी  में  पारंगत  एवं  सभ्य  होते  हैं  जबकि  गावों  के  नागरिक  अधिकतर  कम  आय  वाले  अँग्रेज़ी  न  जानने वाले  व … Continue reading इंडिया, भारत व हिन्दुस्तान

साइकिल पिकनिक और सरदार जी

ये  उन  दिनों  की  बात  है  जब  ढाई  महीने  की  गर्मियों  की  छुट्टी  के  बाद  कॉलेज  आठ  जुलाई  को  खुलते  थे. बड़े  भाई  नरेंद्र  के  साथ  मैं, ताऊ  जी  की  बेटी  इंदु  और  बेटा  कृष्णा  - दोनों  मेरे  हमउम्र, कॉलेज  खुलने  से  एक  दो  दिन  पहले  पिकनिक  मनाने  साइकिलों  पर  डोईवाला  की  ओर  चल  पड़े. … Continue reading साइकिल पिकनिक और सरदार जी

Happy holi

All was quiet when I woke up this morning. I returned from my constitutional, finished my meal and dozed off under the dining table, as I do every day. Within what seemed to me a few seconds I jumped up with a start. The high decibel noise that nearly shattered my eardrums was coming from … Continue reading Happy holi