Tughlakabad Fort

‘Ya rahe ujjar, ya basey gujjar’(Remain uninhabited or be inhabited by gujjars). With these words the Sufi saint Nizamuddin Aulia cursed Emperor Ghiyasuddin Tughlak and his under construction fort a few kilometres from the baoli (stepwell) the saint was building. What caused the saint to so curse the Emperor? Ghiyasuddin had requisitioned all the labour … Continue reading Tughlakabad Fort

Adilabad Fort

After Ghiyasuddin Tughlak's untimely death in 1324, his son Muhammad Bin Tughlak succeeded him and started building a fort of his own almost opposite his late father's Tughlakabad Fort. Even before completion of his Adilabad Fort, as it came to be known, for some unfathomable reason Muhammad shifted his capital to Daulatabad in South India. … Continue reading Adilabad Fort

इस देश का यारों क्या होगा

स्वाधीनता  दिवस  पर  ओजपूर्ण  देशभक्ति  के  गीतों  में  'यह  देश  है  वीर  जवानों  का'  सुना.  विचार  आया  कि  देश  वीर  जवानों  से  कहीं  अधिक  बेईमानों  और  दलालों  का  है  जो  घोटालों  के  ज़रिए  अपनी  जेबें  भरने  में  व्यस्त  रहते  हैं.  प्रेरित  हो  कर  मैंने  उस  ही  गीत  के  आधार  पर  निम्न  पैरोडी  लिखी.  साहिर  लुधियानवी  … Continue reading इस देश का यारों क्या होगा

सन्यास आश्रम

बचपन में माँ बताती थीं कि मनुष्य को अपने जीवनकाल में चार आश्रमों का पालन करना होता है; ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास. पहले में मुख्य ध्येय शिक्षा प्राप्त करना होता है जबकि दूसरे में विवाह, और विवाहोपरांत परिवार का भरण पोषण, संतान की शिक्षा और उनका विवाह ही लक्ष्य होता है. इसके बाद आदमी … Continue reading सन्यास आश्रम