हनुमान टीला

कस्बे का बस अड्डा। बस से उतरते ही सुनाई पड़ा, “चौधरियों का बेट्टा तूई है के?” लगा सिर पर लाठी मार दी किसी ने। धारीदार पाजामे पर हरी कमीज़ पहने एक व्यक्ति सामने खड़ा था। उसी के कण्ठ से निकली थी यह मधुर वाणी। देखता रह गया मैं उसे। “हवेल्ली जागा?” कोई उत्तर ना पाकर … Continue reading हनुमान टीला

आधा कम्बल

कुछ दिन  पहले  मित्र  मधुसूदन  (Madhusudan Singh Poems)  की रचना  ‘माँ-बाप’  पढ़ी।  मेरी  पूर्ण  सहानुभूति  उन  बुज़ुर्गवार  से  है  जिन्हें  साठ  वर्ष  की  आयु  में  इसलिए  काम  करना  पड़  रहा  था  कि  उनके  बेटे  विदेश  चले  गए  और  अपने  पिता  की  खोज-खबर लेना तो  दूर,  कभी  उनसे  मिलने  भी  नहीं  आए।  उनकी  बेटी,  उसी  शहर … Continue reading आधा कम्बल

छिपकली

{यह लेख सर्वप्रथम पिट्सबर्ग, अमरीका से हिन्दी तथा अंग्रेज़ी में प्रकाशित द्वैमासिक पत्रिका 'सेतु' (setumag.com) के अक्टूबर 2020 अंक में प्रकाशित हो चुका है।} लोग  हमें  मक्खीमार  कहते  हैं।  इसलिए  नहीं  कि  हम  निठल्ले  हैं।  बल्कि  इसलिए  कि  मक्खी  मारने  में  हमें  महारत  हासिल  है।  मक्खी  मारना  हमने  बचपन  में  ही  शुरू  कर  दिया  था।  … Continue reading छिपकली

कोरोना काल

{यह लेख सर्वप्रथम पिट्सबर्ग, अमरीका से हिन्दी तथा अंग्रेज़ी में प्रकाशित द्वैमासिक पत्रिका 'सेतु' (setumag.com) के सितंबर 2020 अंक में प्रकाशित हो चुका है।} भगवान  भला  करे  कोरोना  वायरस  का  जिसने  पिछले  दो  महीने  से  हमें  घर  में  कैद  किया  हुआ  है।  दफ्तर  जाने  से  तो  बचे  ही,  हर  रोज  पड़ने  वाली  बड़े  साहब  की  … Continue reading कोरोना काल

मथुरादास जी अमरोहा वाले

{यह लेख सर्वप्रथम पिट्सबर्ग, अमरीका से हिन्दी तथा अंग्रेज़ी में प्रकाशित द्वैमासिक पत्रिका 'सेतु' (setumag.com) के जून 2020 अंक में प्रकाशित हो चुका है।} एक  मुद्दत  से  आरज़ू  थी  फुर्सत  की, मिली  तो  इस  शर्त  से  कि  किसी  से  ना  मिलो। शहरों  का  वीरां  होना  कुछ  यूँ गज़ब  कर  गई, बरसों  से  पड़े  गुमसुम  घरों … Continue reading मथुरादास जी अमरोहा वाले

Judgement Day

First Published in January 2019 issue of 'Setu' (Setumag.com) He shot out of the dark alley, missed hitting Ashutosh by a whisker, stopped in his tracks, his eyes locked with Ashutosh’s for a moment, and he sprinted away like a hare. Aku, as Ashutosh’s friends called him, claimed his car parked near the clock tower … Continue reading Judgement Day

स्वनिर्मित यंत्र से स्वयं के बाल काटिए, आत्मनिर्भर बनिए

अधिकतर  लोग  शेव  खुद  ही  बनाते  हैं  हालाँकि  कुछ  अन्य  खुद  ना  बना  कर  नाई  से  बनवाते  हैं।  ऑफिस  जाने  वाले  ज्यादातर  रोज़  शेव  करते  हैं  और  कुछ  एक  दिन  छोड़  कर।  वैसे  तो  हम  एक  दिन  छोड़  कर  शेव  करने  वालों  की  श्रेणी  में  आते  हैं  लेकिन  लॉकडाउन  में  हमने  दो  शेवों  के  बीच  … Continue reading स्वनिर्मित यंत्र से स्वयं के बाल काटिए, आत्मनिर्भर बनिए

तिल का ताड़, कँकड़ का पहाड़

कितना  सुखी  था  जीवन  जब  टेलिविज़न  पर  सिर्फ  दूरदर्शन  आता  था।   वह  भी  दिन  में  कुछ  घण्टों  के  लिए,  सुबह  और  शाम।  सीरियल  हो  या  फिल्म,  रंगोली  हो  या  समाचार,  जो  कुछ  भी  आ  रहा  हो,  परिवार  के  सभी  सदस्य  एक  साथ  देखते  थे।  एकता  बनी  रहती  थी।  देश  को  एकता  के  धागे  में  पिरोने  … Continue reading तिल का ताड़, कँकड़ का पहाड़

रहट की शहनाई

उस  दिन  अकेला  ही  कॉफ़ी  हाउस  में  बैठा  था।  पुराने  गाने  चल  रहे  थे  जिन्हें  सुनता  हुआ  मैं  अतीत  में खोया  हुआ  था  कि  अचानक  चौंक  कर  वर्तमान  में  आ  गया। "पापा,  ये  रहट  कौन  सा  म्यूजिकल  इंस्ट्रूमेंट  होता  है?" मनोज  कुमार  का  गाना  'मेरे  देश  की  धरती  सोना  उगले . . . ‘   बज … Continue reading रहट की शहनाई