रामजी की शादी

“आज़ादी के बाद की सरकारों में यह सबसे अच्छी सरकार है.” मेरे दोस्त इक़बाल ने भाजपा सरकार के लिए कहा. मैं इक़बाल का मुँह देखता रह गया.

इक़बाल कॉंग्रेसी था और मैं जन संघी. लखनऊ के कॉफी हाउस में घंटों हम दोनों अपनी अपनी पार्टियों के समर्थन में बहस करते हुए लड़ पड़ते थे. फिर भी हम दोनों, मेरे दिल्ली चले जाने के बावजूद, अंतरंग मित्र थे. कई साल बाद काम के सिलसिले में लखनऊ जाना हुआ और हम दोनों एक बार फिर कॉफी हाउस में बैठ कर पुरानी यादें ताज़ा कर रहे थे.

“कल्याण सिंह एक सख़्त मुख्य मंत्री है.” इक़बाल कहता रहा. “उसके राज में गुंडे और बदमाश जान बचाने के लिए यू.पी. से भाग कर दिल्ली में सरेंडर कर रहे हैं.”
“और बाबरी मस्जिद के बारे में क्या कहना है?” मैंने पूछा. उस समय तक बाबरी मस्जिद का पतन नहीं हुआ था.
“कहना क्या है? मस्जिद तोड़ थोड़े ही दी जाएगी. यह तो सिर्फ़ सियासी चालें हैं.”
“बड़ा भरोसा है तुम्हें कल्याण सिंह और भाजपा पर.” मैं चकित था.

अगले दिन मुझे रामपुर जाना था. इक़बाल का छोटा भाई ज़फ़र रामपुर में ही रहता था. उससे भी मिला. उन दिनों मुख्यतः बाबरी मस्जिद ही चर्चा का विषय होती थी. ज़फ़र का कहना था कि “मसला ना तो मस्जिद का है और ना ही मंदिर का.मसला है एक कीमती जायज़ाद का. उस ज़मीन पर मस्जिद रहे या ना रहे, मुसलमान को कोई फ़र्क नहीं पड़ता. हिंदू उस ज़मीन पर मंदिर बनाना चाहते हैं, शौक से बनाएँ. लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि उनके जो मंदिर खंडहर हो गये हैं पहले उनकी मरम्मत कराएँ? ”
“हमारे पड़ोस में एक शिवालय है.” ज़फ़र कहता रहा. ” एक ज़माने से वहाँ पूजा नहीं होती. कोई देख भाल नहीं होती. कोई जाता भी नहीं है वहाँ पर. अगर कोई जाता है तो मुहल्ले के कुत्ते, जो शिवालय को पाखाने की तरह इस्तेमाल करते हैं. उसको क्यों ठीक नहीं कराते?”
दम था ज़फ़र की बात में. मैं कोई जवाब नहीं दे सका. इत्तेफ़ाक़ रखता था उसके साथ.

शाम की चाय पीने के बाद मैने दिल्ली के लिए बस पकड़ी. रामपुर से दिल्ली अधिक दूर नहीं है. सोचा देर तो हो जाएगी लेकिन रात का खाना घर जाकर ही खाऊंगा. हापुड़ पहुँचते पहुँचते अंधेरा हो गया था. ट्रैफिक अधिक होने के कारण बस धीरे धीरे सरकती हुई चल रही थी. फिर उसका सरकना भी बंद हो गया. जाम लगा हुआ था.
दशहरा आने वाला था. हर शहर में जगह जगह रामलीला हो रही थी. यही वजह थी जाम लगने की. आशा के विपरीत, जाम खुलता नज़र नहीं आ रहा था. ना ही बस सरक पा रही थी. काफ़ी देर हो जाने पर कुछ होशियार लोग बस की सीटों पर से गद्दियां लेकर बस की छत पर सोने चले गये. आधी रात हो चली थी और मैं भूख से बिलबिला रहा था. आस पास कोई खाने की जगह नज़र नहीं आ रही थी. नज़र आया तो केवल एक हलवाई और उसके पास भी सिर्फ़ दूध बचा था. सोचा दूध से ही भूख शांत की जाए. सड़क पर भीड़ के सिवाय कुछ नहीं था. हलवाई से एक कुल्हड़ दूध लेकर पीना शुरू किया. आधा ही पिया था की एक बच्चे ने धीरे से मेरा पैर थपथपाया. नीचे देखा तो पाया कि थपथपाने वाला बच्चा नहीं, एक कुत्ता था. बड़ी अशातीत निगाहों से मुझे देख रहा था. उसे निराश करना अच्छा नहीं लगा. बचा हुआ दूध उसे देकर हलवाई से और दूध माँगा. दूध ख़त्म हो चुका था. मान मसोस कर बस में बैठ गया.

समय का अंदाज़ नहीं रहा. न जाने कब बस ने आगे बढ़ना शुरू किया. किसी प्रकार हापुड़ की बाहरी सीमा के पास पहुँचे. यहाँ शायद कुछ चुंगी देनी थी. बस खड़ी हो गई. मैं सोई सोई आँखों से बाहर देख रहा था. सफेद कपड़े पहने एक बुजुर्ग जाट किसी से पूछ रहा था “भाई यो जाम सा क्यूँ लग रा?”
“राम जी की साद्दि होन लग री.” जवाब मिला.
“राम जी की साद्दि के सड़क पै होवै? सड़क पै तो कुत्ते कुत्तियों की साद्दि होवै?” जाट के उदगार सुन कर खुशी हुई. जिन्हें हम अनपढ़ गँवार समझते हैं वे दरअसल कितने समझदार हैं.

इतने साल बीत गये लेकिन राम जी की शादी आज भी सड़क पर ही होती है.

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5 thoughts on “रामजी की शादी

  1. सच में जिन लोगों को हम कम पढ़ा लिखा समझते हैं वो भी अपनी समझदार बातों से हमें अचंभे में डाल देते हैं. एक दिन टॉयलस्टाय मार्ग से बंगाली मार्केट के लिए कोई भी ऑटो ५० रुपये से कम नहीं माँग रहा था, जबकि मीटर द्वारा २० रुपये से अधिक नहीं लगते. बहुत देर बाद एक ऑटो अचानक रुक गया. मैंने उसे कहा २० रुपये दूँगी तो उसने तुरंत मान लिया. मैंने उसकी ईमानदारी की तारीफ की तो वो बोल पड़ा “मेडम जी, हम तो भगवान में विश्वास रखते है और ईमानदारी से काम करते हैं. लोग पत्थर के मंदिर में तो पूजा करते हैं पर भगवान ने हरेक के अंदर जो मन मंदिर बनाया है उसे गंदा रखते हैं. बात ख़त्म होते होते बंगाली मार्केट आ गया. उसकी बात ने मुझे बहुत प्रभावित किया. वाक़ई अगर मन मंदिर स्वच्छ रखा जाए तो किसी और मंदिर में सिर झुकाना ज़रूरी नहीं है.

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  2. Is desh mein bhagwan ke naam pe public ko kitni bhi inconvenience de sakte hain. It is appalling that people don’t know what Hinduism really is or what it preaches.

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    1. Not only bhagwan ke naam pe. Any excuse will do. We Indians never think bother about the inconvenience we may be causing to others as long as we get the slightest benefit. Unfortunate but true.

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  3. कब तक सडको पर शादी होगी और आम जनता परेशान होती रहेगी।

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    1. तब तक जब तक हम अंधविश्‍वास में पड़े रहेंगे और दूसरों की सुविधा असुविधा का ध्यान नहीं रखेंगे.

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